Weathering storm in Ersama
पर्यटन:
पर्यटन दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक क्षेत्र माना जाता है। यह तेजी से बढ़ रहा है यह दुनिया के उत्पादन का 6% है और सौ मिलियन लोगों को रोजगार देता है । पर्यटन राजस्व का सबसे बड़ा स्रोत है । यह प्राकृतिक राजस्व का सक्षम उद्योग है । संसार के विभिन्न हिस्सों से लोग मनोरंजन , धर्म, ज्ञान , इतिहास इत्यादि पर आधारित यात्रा करते हैं और विभिन्न संस्कृतियों और परंपराओं के संपर्क में आते हैं । यह विभिन्न राष्ट्रों के लोगों को एक दूसरे के रीति-रिवाजों और जीवन के अन्य पहलुओं के साथ निकट संपर्क में आने की अनुमति देता है। यह एक देश की प्राकृतिक सुंदरता और अतीत की विरासत को दूसरे देश के लोगों के सामने प्रकट करता है। इस प्रक्रिया में प्राप्त ज्ञान और अनुभव से अधिक समझ और सहिष्णुता पैदा हो सकती है और विश्व शांति को भी बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि कोरोना काल में यह संभव नहीं हो पाया जिसकी वजह से अनेक देशों को बहुत अधिक आर्थिक नुकसान हुआ है । कोरोना प्रोटोकॉल्स का पालन करते हुए फिर से इस दिशा में प्रयास किया जाना चाहिए ।
पर्यटन का योगदान आर्थिक क्षेत्र से ज्यादा स्पष्ट रूप से कहीं ओर नहीं देखा जा सकता है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि विकासशील देश विशेष रूप से पर्यटन से लाभ प्राप्त कर सकते हैं जो राष्ट्रीय आय को बढ़ाता है और रोजगार पैदा करता है। इसके लिए प्रत्येक देश अपने भौगोलिक दृश्यों की सुंदरता में चार चांद लगाकर पर्यटन को बढ़ावा देने में तत्परता से कार्य कर रहा है । मध्यम वर्गीय परिवार भी आजकल कुछ समय परिवार के साथ आस पास की छोटी यात्राएं कर पर्यटन को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
परंतु पर्यटन के कुछ बदसूरत पक्ष भी हैं । यह सामाजिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय समस्याओं का कारण बनता जा रहा है। पानी और अपशिष्ट पदार्थों के निपटान की सुविधा प्रदान करने के लिए अंधाधुंध निर्माण प्राकृतिक प्रणालियों को नष्ट कर रहा हैं । और पर्यावरणीय संपदा के अत्यधिक उपयोग से पारिस्थितिक संतुलन को बिगड़ रहा है। सबसे अधिक नुकसान वन्य-जीवों पर पड़ रहा है जो सदा से पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहे हैं । पर्यटक जमीन की वनस्पति को नष्ट कर देते हैं जानवरों की भोजन की आदतों और परिदृश्य को भी प्रभावित करते हैं। भीड़भाड़ के कारण भू-वनस्पति का कटाव और विनाश भी होता है।
चूंकि पर्यटन उत्पादन का एक बहुत बड़ा क्षेत्र है अतः इसे बचाए रखने के लिए निजी और सामाजिक स्तर पर कदम उठाए जाने चाहिएं। इस को बचाने के लिए उन कारकों को समझना अनिवार्य है जो पर्यटन के विकास में बाधा डालते हैं और उन्हें प्रभावी ढंग से दूर करने का प्रयास करना चाहिए । अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती हिंसा और आतंकवाद के कारण पर्यटन प्रभावित हुआ है। अतः इस समस्या को सुलझाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रयास करने चाहिए । चाहे जो भी समस्या हो, भारत को इस उद्योग से होने वाले लाभों को बढ़ावा देने के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए क्योंकि हमारे देश के पास दूर-दूर से आने वाले पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए मनमोहक परिदृश्य, शौर्य, ज्ञान , आत्मिक शांति , गौरवशाली इतिहास इत्यादि वो सब कुछ है जिसकी खोज में लाखों लोग भारत आना चाहते हैं ।
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