जीवन की घड़ियां वृथा न खो....... किसी विद्वान ने बहुत ही सुंदर तरीके से इस बात को मनुष्य को समझाने की कोशिश की है परंतु हम मनुष्य हैं कि इस बात को समझते ही नहीं । भगवान ने यह जन्म हमें ऐसे ही नहीं दिया कि इसको भौतिकतावादी बनकर गवां दें परंतु इसके पीछे बहुत बड़ा कारण रहा होगा , इसके पीछे उनकी असीम कृपा रही होगी कि हमें मनुष्य जन्म दिया । परंतु बड़े दुख की बात है हम भूल गए कि हम मनुष्य हैं और हमने अपने लक्ष्य की तरफ ध्यान ही नहीं दिया । हमारे जीवन का उद्देश्य क्या है उसको ही नहीं जाना । संसार में आए, थोड़े बड़े हुए, पढ़ाई में लग गए । पढ़ाई भी हो गई तो नौकरी में लग गए और जैसे ही परिवार की जिम्मेवारी हम पर आई हम लग गए पैसा कमाने में । किसको कितना दिया ? किसकी कितनी सहायता करी ? इस बात की तरफ तो कभी ध्यान ही नहीं दिया । किसी ओर की तो छोड़ो हमने अपनी तरफ भी ध्यान नहीं दिया । क्योंकि ध्यान दिया होता तो अपने स्वास्थ्य के बारे में सबसे पहले सोचते परंतु बड़ी अजीब स्थिति हमारे सामने है ; हम सभी चीजों को समय देते हैं - गाड़ी खरीदनी है तो गाड़ी के बारे में ...
प्रकृति मनुष्य को कभी भी धोखा नहीं देती अगर मनुष्य उसका दोहन ना करें। इसका जीता जाता उदाहरण हम देख सकते हैं कि कुदरत ने किस तरह से हिमाचल प्रदेश उत्तराखंड में कहर बरपाया है । मनुष्य ने विकास के नाम पर प्रकृति का इतना दोहन किया कि प्रकृति को गुस्सा आ गया और अपना गुस्सा बाढ़ के रूप में , बादल फटने के रूप में , घनी बारिश के रूप में और भूस्खलन के रूप में दिखाया । इसीलिए हमें प्रकृति का दोहन ना कर उसकी शरण में जाना चाहिए जैसे प्राचीन समय में हमारे ऋषि मुनि जाते थे और उत्तम स्वास्थ्य एवं मन की शांति को प्राप्त करते थे । तो आइए जानते हैं कि प्रकृति से हम अपने स्वास्थ्य को कैसे सुंदर और उत्तम बना सकते हैं । मिट्टी से रोग प्रतिरोधक क्षमता का बढ़ाना :- मिट्टी के संपर्क में रहने से मनुष्य की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। उसको पोषण मिलता है उसके अंदर जितने भी पोषक तत्वों की कमी होती है वह दूर होती है। मिट्टी मां की तरह मनुष्य का ख्याल रखती है , उसकी सेहत बनाने में मदद करती है । हम अपनी दादी-नानी से बहुत सारे नुस्खे सुनते आए हैं। उनमें से एक ह...