Weathering storm in Ersama
प्रकृति मनुष्य को कभी भी धोखा नहीं देती अगर मनुष्य उसका दोहन ना करें।
इसका जीता जाता उदाहरण हम देख सकते हैं कि कुदरत ने किस तरह से हिमाचल प्रदेश उत्तराखंड में कहर बरपाया है । मनुष्य ने विकास के नाम पर प्रकृति का इतना दोहन किया कि प्रकृति को गुस्सा आ गया और अपना गुस्सा बाढ़ के रूप में , बादल फटने के रूप में , घनी बारिश के रूप में और भूस्खलन के रूप में दिखाया । इसीलिए हमें प्रकृति का दोहन ना कर उसकी शरण में जाना चाहिए जैसे प्राचीन समय में हमारे ऋषि मुनि जाते थे और उत्तम स्वास्थ्य एवं मन की शांति को प्राप्त करते थे । तो आइए जानते हैं कि प्रकृति से हम अपने स्वास्थ्य को कैसे सुंदर और उत्तम बना सकते हैं ।
मिट्टी से रोग प्रतिरोधक क्षमता का बढ़ाना :- मिट्टी के संपर्क में रहने से मनुष्य की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। उसको पोषण मिलता है उसके अंदर जितने भी पोषक तत्वों की कमी होती है वह दूर होती है। मिट्टी मां की तरह मनुष्य का ख्याल रखती है , उसकी सेहत बनाने में मदद करती है । हम अपनी दादी-नानी से बहुत सारे नुस्खे सुनते आए हैं। उनमें से एक है कि जब चेहरे पर पिंपल्स निकल आते हैं तो मुल्तानी मिट्टी का लेप किया जाता है । जब बाल झड़ने लग जाते हैं , चमक खो देते हैं तो भी मुल्तानी मिट्टी से सिर को धोने की सलाह दी जाती है। जब किसी के नाखून के पास की पोल पक जाती है तो भी उसके ऊपर मिट्टी का लेप लगाया जाता है । यहां तक की प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से तो पूरे शरीर पर मिट्टी का लेप लगा दिया जाता है ताकि जितने भी टॉक्सिक्स बने हुए हैं मिट्टी उनको बाहर खींच कर निकाल दे और हमारे शरीर को एकदम शुद्ध बना दे । यहां तक की मिट्टी से बने घड़े का पानी पीने के लिए उत्तम माना जाता है क्योंकि वह भी हमारे शरीर में पोषक तत्वों की कमी को दूर करता है । मिट्टी के बर्तन में खाना बनाना सबसे उत्तम माना जाता है । आज के इस वैज्ञानिक युग में मिट्टी के नई और आधुनिक तकनीक से बर्तन बनाए जाते हैं जो कि गैस चूल्हे पर भी काम करते हैं । मिट्टी के बर्तन में जो भी खाना बनता है वह धीमी आंच अर्थात कम तापमान पर बनता है और धीमी आंच पर हमारे भोजन में जितने भी पोषक तत्व है वो नष्ट नहीं होते । इसीलिए जितना संभव हो सके हमें मिट्टी के संपर्क में रहना चाहिए ताकि हम स्वास्थ्य को उत्तम बना सकें ।
सूर्य से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना:- उगते सूरज को देखना लोग अपना सौभाग्य मानते हैं । उगते सूरज को देखने के लिए सुबह जल्दी उठ भी जाते हैं ।भारतीय सिद्धांतों की अगर बात करें तो लोग सुबह सूर्य पूजा करते हैं । सूर्य देव को जल अर्पित करते हैं । हमारे जो पूर्वज थे वो बहुत ही समझदार थे और जानते थे कि सुबह- सुबह सूर्य की किरणों का शरीर पर पढ़ना अत्यधिक महत्वपूर्ण है और वह हमें स्वास्थ्य प्रदान करता है इसीलिए उन्होंने यह जल चढ़ाने की परंपरा शुरू कर दी। आधुनिक समाज में रहते हुए भी बहुत सारे लोग समुद्र के किनारे बैठ कर के सूर्य स्नान करते हैं । यह सूर्य स्नान ना सिर्फ मन को शांति प्रदान करता है बल्कि उत्तम स्वास्थ्य भी प्रदान करता है और रोगों से लड़ने की क्षमता उत्पन्न करता है । इस स्वास्थ्य को प्राप्त करने के लिए लोग बहुत सारे पैसे खर्च करते हैं, समुद्र किनारे जाते हैं लेकिन इसको हम घर में रहते हुए भी प्राप्त कर सकते हैं सुबह-सुबह उठकर अपने आंगन में , अपनी बालकनी में बैठकर हम कम से कम 20 मिनट उगते हुए सूर्य की किरणों को अगर अपने ऊपर पड़ने दें तो यह बहुत अच्छा सूर्य स्नान हो जाता है और हमारी रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ जाती है । सर्दियों के दिनों में सूर्य स्नान , घर के अंदर किसी कमरे में जहां धूप आती है ,वहां पर भी लिया जा सकता है ताकि हवा के संपर्क में ना आएं । इसीलिए भारत की हर परंपरा को तार्किक दृष्टि से देख कर, उसके पीछे जो वैज्ञानिकता छिपी हुई है, उसका अवलोकन करते हुए उस परंपरा से हमें मुफ्त में फायदा उठाना चाहिए । सूर्य एक बहुत बड़े डॉक्टर के रूप में काम करते हैं इसीलिए सुबह सुबह हम सभी को सूर्य देव की शरण में आना चाहिए ताकि जितनी भी बीमारियां हैं हमारे शरीर में, हम उसको आसानी से दूर कर सकें ।
जल से स्वास्थ्य प्राप्ति :- पानी के बिना मनुष्य जीवित नहीं रह सकता और ना ही कोई और प्राणी । जल ही जीवन है । पानी पीने के उपयोग में तो लाते ही हैं, दैनिक कार्य के लिए भी इसको उपयोग में लाते हैं परंतु पानी को हम अपनी चिकित्सा करने के लिए भी प्रयोग में ला सकते हैं। तैराकी के लिए पानी की आवश्यकता है और तैराकी बहुत अच्छी एक्सरसाइज है । पानी से अलग-अलग बीमारी में अलग अलग स्नान किया जाता है जैसे गर्म पानी का स्नान, ठंडे पानी का स्नान , बर्फ के पानी का स्नान । गर्म पानी की पट्टी, ठंडे पानी की पट्टी को भी विशेष रूप से बीमारियों को ठीक करने के लिए प्रयोग में लाया जाता है। बर्फ से मसाज कर सूजन को कम किया जा सकता है । बर्फ से मसाज कर त्वचा को भी स्वस्थ बनाया जा सकता है । गुनगुने पानी को तो वेदों में औषधि बताया गया है । पेट में दर्द होने पर अगर हल्का गर्म पानी पी लिया जाए तो पेट के दर्द में राहत दिलाता है । खाना खाने के तुरंत बाद अगर आधा कप गरम पानी चाय की तरह पी लिया जाए तो वह हमारे डाइजेस्टिव सिस्टम को उत्तम बनाता है। हमारे शरीर में ब्लड सरकुलेशन सही रूप से चलता रहे इसीलिए हमें कम से कम 7 से 8 गिलास पानी दिन भर में पीने चाहिएं । प्रातः काल उठते ही तीन से चार गिलास पानी पीने से पेट अच्छी तरह से साफ हो जाता है और पेट का साफ होना का मतलब है सब सब रोगों का दूर भगाना । इसीलिए जल के महत्व को समझते हुए हमें इसे व्यर्थ नहीं बहाना चाहिए ।
आकाश से स्वास्थ्य प्राप्ति :- खुले आसमान के नीचे बैठना किसे अच्छा नहीं लगता? रात को चांद तारे देखना किस के मन को नहीं भाता?
सुबह-शाम खुले आसमान के नीचे , और ताजी हवा में सैर करना सभी के मन को लुभाता है । इसके पीछे एक बहुत बड़ा कारण है हम सभी जानते हैं कि हमारा शरीर पांच तत्वों से मिलकर बना है और उन पांच तत्वों में एक तत्व आकाश भी है ।जब हम खुले आसमान के नीचे रहते हैं तो हमारे उस आकाश तत्व की पूर्ति हो जाती है । हमारा मन प्रफुल्लित हो जाता है । जैसा कि आज आप सभी जानते हैं कि आज के आधुनिक दौर में ज्यादातर बच्चे घरों में रहते हैं । बाहरी खेलों को महत्व नहीं देते । रात को आसमान के नीचे नहीं सोते सुबह ताजी हवा में सैर नहीं करते तो उनका शारीरिक विकास इस अच्छे से नहीं हो पाता । प्राचीन समय में मनुष्य का शरीर हटा-कटा हष्ट पुष्ट होता था। परन्तु आज ऐसा हो रहा। बच्चों की लंबाई नहीं बढ़ती इसके पीछे आकाश तत्व का कम होना बड़ा कारण है । इसीलिए जितना हो सके खुले आसमान के नीचे बैठकर अपने बच्चों को कहानी सुनाते हुए उनके और अपने आकाश तत्व की कमी को पूरा करने की कोशिश करें ।
उपरोक्त विधि से चिकित्सा करने से हम अपने शरीर में पांचों तत्वों की पूर्ति भी करते हैं और यही वास्तव में हमारे स्वस्थ रहने का आधार भी बनते हैं
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