योग भगाए रोग

भोगी नहीं, योगी बनो ।

रोगी नहीं स्वस्थ बनो।।


प्राचीन समय से ही योग का संबंध मनुष्य से रहा है । हमारे वेदों में भी योग का वर्णन है । ऋषि-मुनियों ने बहुत बहुत बड़ी-बड़ी साधनाएं  योग के बल पर ही की हैं।   योग से मन और मस्तिष्क दोनों दोनों में तालमेल बिठाया जा सकता है और सभी कार्य सुचारू  रूप से किए जा सकते हैं। योग मन और मस्तिष्क दोनों को शांत रखता है । योग के बल पर हम असीम शक्तियों को प्राप्त कर सकते हैं। योग के बल पर  ही बड़े बड़े महापुरुष बने हैं  । हमारे महापुरुष योग करते थे, नियमों का पालन करते थे , ब्रह्मचर्य का पालन करते थे इसीलिए वो इतने बहादुर थे कि दुश्मन उनके सामने टिक न पाते थे। भगवान श्री कृष्ण के बारे में तो हम सभी जानते हैं , बहुत बड़े योगी थे वो । योग के बल पर ही उन्होंने 16 कलाएं सीखी थी। और सभी में सामंजस्य स्थापित किया था। भगवान शिव तो आज भी उनकी मूर्तियों में योग मुद्रा में ही दिखाई देते हैं । सदैव ध्यान में बैठे रहते थे । समाधि लगाकर रखते थे जोकि योग का अंतिम पड़ाव है। आज के आधुनिक दौर की अगर बात करें तो आज के समय में योग वैश्विक स्तर पर देखा जा सकता है ।सभी लोगों में योग को करने का क्रेज बढ़ा है । और योग को बढ़ावा देने के लिए 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस भी मनाया जाता है ।  योग हमारी दिनचर्या का एक अहम् हिस्सा होना चाहिए।


योग का सामान्य अर्थ  होता है - जुड़ना । यहां पर आत्मा और परमात्मा के योग के बारे में बात की गई है । अपने मन को सभी ओर से हटाकर प्रभु का ध्यान करना,  आप अपने आप को जानना ही योग कहलाता है। महर्षि पतंजलि ने अपने योग सूत्र में स्पष्ट किया है कि  चित्तवृत्तियों को साधना ही योग कहलाता है अर्थात मन को शांत करना , सभी दिशाओं से हटाकर एक दिशा में ध्यान लगाना अर्थात् परमात्मा का ध्यान लगाना। योग 8 प्रकार का है यम  , नियम , आसन , प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा ,ध्यान समाधि । आज के समय में ज्यादातर लोग योग  आसन और प्राणायाम तक ही सीमित हैं और यदि मनुष्य सिर्फ इन दो चीजों का भी पालन कर ले तो भी वह अपने स्वास्थ्य को बहुत उत्तम प्रकार का बना सकता है। इनको करने के लिए मनुष्य को दृढ़ संकल्प भी लेना पड़ेगा , और उसको अनुशासन में रहकर नियमित रूप से करना भी पड़ेगा तो यम और नियम भी वह जाने अनजाने  में पालन कर ही लेता है। प्राणायाम करते करते मनुष्य का ध्यान भी कुछ हद तक लग ही जाता है और नहीं तो गायत्री मंत्र का जप करते हुए या किसी भी अपने इष्ट देव की पूजा करते हुए कुछ पल के लिए मनुष्य  का ध्यान स्वत: ही लग जाता है। क्योंकि ध्यान से मनुष्य को शांति मिलती है , यह आत्मा की भूख को शांत करता  है । 


आसन करने लगे तो इतनी संख्या में है कि वह खत्म ही नहीं होते और ना ही इतना समय हमारे पास होता है कि हम सारे आसन कर पाएं । इसीलिए हमारे ऋषि-मुनियों ने पहले ही आसनों को श्रेणी विभाजित कर दिया  था अर्थात किसी विशेष बीमारी के लिए विशेष तरह के आसनों  को निर्धारित कर दिया गया था । इसी तरह से प्राणायाम भी कुछ विशेष श्रेणी में रखे गए थे। स्वस्थ रहने के लिए हमें कुछ विशेष आसन और 8 प्राणायाम रोज करने चाहिएं  जो इस प्रकार हैं :- भस्त्रिका , कपालभाति , बाह्य प्राणायाम अनुलोम-विलोम ,उज्जयी , भ्रामरी , उदगीथ ,प्रणव प्राणायाम । सूर्य नमस्कार आसन एक संपूर्ण आसन माना गया है। आसन के 21 से 108 चक्र करने से शरीर लचीला ,स्वस्थ, मजबूत बनता है और पूरे शरीर का व्यायाम हो जाता है । इसे करने से जिम में जाने की भी कोई आवश्यकता नहीं । बच्चों को हाइट बढ़ाने के लिए 5 आसन रोज करने चाहिए जो इस प्रकार हैं ताड़ासन, सर्वांगासन ,भुजंगासन ,चक्रासन और सूर्य नमस्कार । शीर्षासन सबसे उत्तम आसन है इसे करने से मस्तिष्क, सिर ,मुख ,गला ,आंख, नाक, कान इत्यादि से संबंधित कोई भी रोग नहीं होता । इस प्रकार हर आसन और हर प्राणायाम को करने से कुछ विशेष फायदे होते हैं जो हमें स्वस्थ बनाए रखने में सहायता करते हैं । और ऐसा करने से हमारी दिनचर्या भी नियमित हो जाती है । मुख पर एक विशेष तेज छा जाता है । ब्लड सर्कुलेशन अच्छे से होता है । शरीर के सारे टॉक्सिक्स पसीने के माध्यम से बाहर निकल जाते हैं । अतः हम सबको योग अपनाना ही चाहिए । 

योगशचित्तवृत्तिनिरोध: योग करने से ही चित्त को शांत किया जा सकता है और मन के सारे विकारों को दूर किया जा सकता है ।


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