योगीराज श्री कृष्ण

श्री कृष्ण  का चरित्र अनुकरण करने योग्य है । वे एक महान योगी थे , वेदों के ज्ञाता थे । वे सभी ऐश्वर्यों के स्वामी थे

 वह एक ऐसे महापुरुष थे जिनको गुण ,कर्म ,चरित्र के आधार पर स्वामी दयानंद ने आप्तपुरुषों के समान बताया है। दुर्योधन भी मानते थे कि तीनों लोकों में श्रीकृष्ण सा पूज्नीय कोई ओर  था ही नहीं। धृतराष्ट्र के अनुसार श्रीकृष्ण अपने जीवन में कभी पराजित नहीं हुए और उन में इतने गुण हैं कि जिनकी परिगणना करना संभव नहीं है । भीष्म पितामह के अनुसार कृष्ण द्विजातियों  में ज्ञानवृद्ध,  वेदों के ज्ञाता और  क्षत्रियों में  सबसे अधिक  बलशाली थे । दान, दया ,बुद्धि, शालिनता, चतुराई, शूरता ,नम्रता ,तेजस्विता, धैर्य संतोष आदि गुण श्री कृष्ण के अतिरिक्त किसी ओर में नहीं हैं जिसकी वजह से वह पूजनीय हैं । शिशुपाल जैसा व्यक्तित्व भी उनके ऊपर एक भी लांछन ना लगा पाया  ।

 उनके विरोधी भी श्रीकृष्ण का सम्मान करते थे । कृष्ण ने कंस का वध किया,  दुष्टों का दमन किया और कंस  के कारागार से  निर्दोष व्यक्तियों को  मुक्त करवाया । जो व्यक्ति दुष्टों का दमन करने वाला हो, द्रोपदी के चीर हरण को रोकने वाला हो - उसकी रक्षा करने वाला हो, वह भला गोपियों के वस्त्र क्यों चुरायेगा ?   श्री कृष्ण के घर में इतनी गायें थी कि माखन, छाछ, दूध इत्यादि की कोई कमी नहीं थी । और  घर में  कोई चीज भरपूर मात्रा में हो तो उसे चुराने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता  । तो ऐसे में श्री कृष्ण माखन चोर कैसे  हो सकते हैैं ?

 श्री कृष्ण 7 वर्ष की आयु में गुरुकुल में शिक्षा ग्रहण करने चले गए थे और जब उनकी शिक्षा संपूर्ण हुई तो वहां से वह एक महान योगी , वेदों के विद्वान दयालु,  दुष्टों का दमन करने वाले व्यक्तित्व को धारण करके आए थे । श्री कृष्ण एक महान योगी और ब्रह्मचर्य का पालन करने वाले  थे  । रुकमणी उनकी एकमात्र पत्नी थी।   शादी के पश्चात भी 12 वर्ष तक ब्रह्मचर्य का पालन किया । प्रद्युम्न उनके पुत्र का नाम था ।  उनके हाथ में  केवल मुरली ही नहीं बल्कि दुष्टों के विनाश के लिए सुदर्शन चक्र भी था । श्रीकृष्ण धर्म की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते थे  । अर्जुन का साथ दिया - पांडवों का साथ दिया क्योंकि वे धर्म की रक्षा के लिए युद्ध लड़ रहे थे और अर्जुन जब मोह में फंसकर शस्त्र नहीं उठा पा रहा था तो उसे गीता का उपदेश दिया । गीता के उपदेश में श्री कृष्ण ने जीवन के बहुत से रहस्यों से पर्दा उठाया है । आत्मा, जीवन, कर्म, पुरुषार्थ, मोह, क्रोध, भय आदि रहस्यों को उजागर किया है । 
अतः जरूरत है श्री कृष्ण के प्रति अपने दृष्टिकोण को बदलने की । श्री कृष्ण को हम भगवान मानते हैं उनकी पूजा करते हैं और जो भगवान होते हैं उनके चरित्र में कोई कमी नहीं होती । भगवान संपूर्ण होते हैं ,निष्पक्ष होते हैं, अधर्म का विनाश करने वाले होते हैं । योगीराज श्रीकृष्ण भी अधर्म का विनाश  करने को तत्पर रहते थे । उनका दमन करते थे । उन्होंने अधर्म का कभी साथ नहीं दिया  सदैव धर्म को स्थापित करने का प्रयास किया । इसीलिए उनके चरित्र को निष्पक्षता से देखें और उसका पालन करें ।

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